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योगी के बुलडोजर एक्सप्रेस से अखिलेश का पीडीए हुआ दुर्घटनाग्रस्त

 

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-अयोध्या के अति पिछड़ा वर्ग की बालिका से महीनों हुए रेप का आरोपी निकला सपा का पदाधिकारी और उसका सहयोगी, दोनों मुस्लिम समुदाय के हैं, सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने उनके बचाव में 'डीएनए' टेस्ट की मांग करके खुद को जातीय राजनीति के जाल में फंसा लिया l

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-कैलाश सिंह-

राजनीतिक सम्पादक

लखनऊ l उत्तर प्रदेश के अयोध्या में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अति पिछड़ा वर्ग की बालिका से महीनों रेप करने वाले आरोपियों पर कारवाई शुरू करके एक बार फ़िर यह साफ़ कर दिया कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में जातिगत राजनीति भी आड़े नहीं आने पाएगी l लखनऊ के गोमती नगर की घटना में तो केवल बदसलूकी हुई और पुलिस वाले तक भी नप गए थे l जबकि अयोध्या की घटना ने तो सामाजिक विकृति को भी तार- तार कर दिया l इस तरह के कृत्य में शामिल आरोपियों के बचाव में 'डीएनए' टेस्ट की माँग करना साफ़ जाहिर करता है कि सपा सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव मुस्लिम वोट बैंक के लिए जातिगत राजनीति के जाल में फंसकर अपने 'पीडीए' फार्मूले को योगी के बुलडोजर एक्स्प्रेस से दुर्घटनाग्रस्त करा लिए l यदि मुस्लिम वोट बैंक के लिए इस तरह किसी का पक्ष लेना ही था तो उन्हें आज़म खान के बचाव में आना चाहिए था, तब उन्हें कम से कम इतना शर्मसार न होना पड़ताl इस मामले में हुई कार्रवाई को बसपा सुप्रीमों सुश्री मायावती ने उचित ठहराया l अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि सपा सरकार के अपने कार्यकाल में अखिलेश यादव ने ऐसे मामलों में कितने 'डीएनए' टेस्ट कराने के आदेश दिए थे? 

राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से देखें तो अखिलेश यादव का पीडीए ( पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश में फेल हो गयाl यूपी में इस फार्मूले की सफ़लता का रास्ता भाजपा के आंतरिक कलह के बीच से निकला और कांग्रेस के नाम पर मुस्लिम वोट बैंक और पिछड़ा वर्ग आरक्षण मुद्दे के सहारे ने यूपी में 37 सीटों पर जीत दिला दी l यह जीत लोकसभा या विधान सभा में पार्टी के प्रासंगिक बने रहने के लिए तो ठीक है लेकिन सत्ता तक पहुँचने के लिए केवल (एम+ वाई) मुस्लिम- यादव काफी नहीं हैंl इसके लिए अति पिछड़ा और दलित का भी साथ होना जरूरी है l 

अखिलेश यादव ने हालांकि अपने ट्वीट से डीएनए जाँच की मांग वाला पोर्शन बाद में हटा दिया था लेकिन फैजाबाद के सपा सांसद अवधेश सरोज वही बीन बजाते रहे जिसके चलते दलित और अति पिछड़ों का सपा से मोह भंग और योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई से भाजपा के प्रति लगाव बढ़ना स्वाभाविक है l अब उन्हें समझ आने लगा कि आरक्षण खत्म करने की बात झूठी थी l अखिलेश यादव को अति पिछड़ा और मुस्लिम में से किसी एक को चुनना होगा तो उनकी पहली पसन्द मुस्लिम होगा l अति पिछड़ा वर्ग उनके लिए 'आने और जाने' वाला वोट बैंक है l 

दरअसल लोकसभा चुनाव से पूर्व तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की तरफ़ मुस्लिमों का बढ़ा रुझान देखकर घबराए अखिलेश यादव ने यूपी में कांग्रेस से समझौता करके इंडिया  गठबंधन का हिस्सा बन गए अन्यथा वह पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ अलग गठबंधन पर सोच रहे थे l इसी दौरान भाजपा की आंतरिक कलह और अमित शाह द्वारा गैर भाजपाइयों को टिकट देने से संगठन के लोगों की नाराज़गी के साथ आरक्षण के मुद्दे ने इंडिया गठबंधन के लिए 'सोने में सुगंध' का काम कर दियाl दलितों में संविधान बचाओ के नारे का असर मायावती के वोटबैंक पर भारी पड़ गयाl अयोध्या में रेप कांड के मामले में अखिलेश यादव द्वारा मुस्लिम आरोपियों का पक्ष लेने के मूल कारण में कांग्रेस और बसपा से डर की परछाईं अधिक गहरी है l

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