Jaunpur
जम्मू कश्मीर में जिस धारा 370 को हटाने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी शहीद हो गये थे आज उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह ने समाप्त कर दिया है। उन्हांेने कहाकि जौनपुर के विकास में तिलकधारी शिक्षण संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान है। उक्त बातें परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के तत्वाधान में पूर्व मंत्री स्व. उमानाथ सिंह की 30वीं पुण्यतिथि पर तिलकधारी महाविद्यालय के बलरामपुर सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किया। श्री सिंह ने कहाकि स्व. उमानाथ सिंह राम जन्मभूमि आंदोलन में जेल गये थे। आज 500 वर्षों के बाद रामजन्मभूमि मुक्त हो गयी। उन्होंने आगे कहाकि स्व. उमानाथ सिंह ने यहां के लोगों को राष्ट्रीय विचारधारा से जोड़ने का कार्य किया है। परिवहन राज्यमंत्री ने यहां भव्य रोडवेज एवं इलेक्ट्रिक बसों को चलाये जाने का अनुरोध स्वीकार करते हुए लखनऊ एवं प्रयागराज के लिए अतिरिक्त दो बसें चलवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहाकि हमारे यहां जूता चप्पल बाहर निकालकर घर में जाने की परम्परा रही है। समारोह के विशिष्ट अतिथि खेलकूद एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीशचन्द्र यादव ने स्व. उमानाथ सिंह के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहाकि वे प्रदेश के किसी भी जनपद में जाते हैं तो वहां के वरिष्ठ नेता या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने पदाधिकारी स्व.उमानाथ सिंह के बारे में अवश्य चर्चा करते हैं। इससे उनके व्यक्तित्व का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहाकि उमानाथ सिंह के समय से पहले चले जाने से जिले का ही नहीं अपितु पूरे देश को क्षति पहुंची। दीप प्रज्जवलन के बाद तिलकधारी महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद डा. केपी सिंह, भाजपा नेता धर्मेन्द्र सिंह द्वारा अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संचालन महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. समर बहादुर सिंह तथा आभार ज्ञापन प्रबंध राघवेन्द्र सिंह ने किया। उक्त अवसर पर पूर्व प्राचार्यगण डा. अरूण कुमार सिंह, सत्यप्रकाश सिंह,राममोहन सिंह, डा. डीआर सिंह, दुष्यंत सिंह एडवोकेट,संत प्रसाद राय, सतीश कुमार सिंह, डा. उदय पाल सिंह, प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

