विषाक्त हो गया आदि गंगा गोमती का जल, घाटों का सुंदरीकरण तो हुआ परंतु नहीं हुई नदी की सफाई
जौनपुर। जनपद की पहचान आदि गंगा गोमती का अस्तित्व आज संकट में है। इस नदी का पानी कुछ वर्षों पहले चुल्लू से पीकर लोग तृप्त हो जाते थे परंतु आज वह विषाक्त हो चुका है। गंदगी के कारण नदी के उत्तरी तट पर सोने चांदी का कारोबार करने वालों की बड़ी संख्या है। सोने चांदी को गलाने के लिए तेजाब का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में तेजाब नालियों में पानी के साथ बहकर सीधे गोमती नदी में पहुंचता है। इसके अलावा कई स्थानों से शहर का गंदा पानी नालों में बहता हुआ नदी में जहर घोलने का काम करता है। नदी का पानी विषाक्त हो जाने के कारण मछलियों के मर जाने की घटना भी देखने केा मिलती है। पिछले कई वर्षों से वर्षा में आ रही गिरावट भी नदी के लिए संकट है। नदी के घाटों का सुंदरीकरण तो कर दिया गया परंतु इसकी सफाई का काम नहीं हो पाया। कुछ सामाजिक संस्थाओं ने गोमती आरती का आयोजन करके नदी की ओर लोगों का ध्यान अवश्य खींचा परंतु जल प्रदूषण के बिंदु पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए भी योजनाएं बनायी गयी परंतु उनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से नहीं हो सका। जनप्रतिनिधि भी इस समस्या से अनभिज्ञ हैं।