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सुदामा चरित्र को सुनकर श्रोता हुए मन्त्रमुग्ध

Jaunpur 

सुजानगंज क्षेत्र के ग्राम सभा सकापुर श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथा वाचक मनीष शरण जी महाराज ने सुदामा चरित्र को सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया।

कथा वाचक ने कहा कि सुदामा जी जब भिक्षा मांग कर घर वापस लौटे तो बच्चों ने भोजन की इक्षा जताई तो सुदामा ने बच्चों को कहा कि आज कुछ भी भिक्षा नहीं मिला है भगवान ने चाहा तो हम कल ज़रूर भोजन करेंगे आज भूखे सो जाओ. और फिर अपनी पत्नी सुशीला से अपने बाल सखा मित्र  से मिलने के लिए अनुमति लेकर चलते हुए कहते हैं कि कुछ कहना है तो बताओ मैं कह दूँगा तो पत्नी सुशीला बोली कि मेरी बहुत शिकायत है आपके कन्हैया से कहना की एक महीने में दो बार एकादशी व्रत आती है पर मेरे घर में तो हर रोज एकादशी होती है तो क्या हमारी ग़रीबी आपको नहीं दिखती है गोविंद. और सुदामा पहुंच जाते हैं द्वारिकापुरी द्वारकाधीश के यहां जहा का अद्भुत नज़ारा देख आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

आँखों में आंसू की निर्मल धार बहने लगती है गोविंद के गले से लिपटे रहते हैं और कथा वाचक ने कहा कि भगवान राजा और रंक में कोई भेद नहीं करते हैं। भगवान के बाल सखा सुदामा गरीब थे, लेकिन उनका एक-दूसरे के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण था। कथावाचक ने भगवान के प्रति भक्ति में ऐसा ही समर्पण लाने की बात कही। उन्‍होंने गृहस्थ धर्म का पालन करने की सीख देते हुए कहा कि गृहस्थ में रह कर अपने कर्तव्यों की पालन करने के साथ ही भगवत भक्ति करनी चाहिए। कहा कि जब भी भक्त पर किसी प्रकार का संकट आता है और भक्त निश्छल भाव से भगवान को पुकारता है, भगवान भक्त के सभी दुख को दूर कर देते हैं। भगवान भाव के भूखे होते हैं। सुदामा के संकट को भी भगवान कृष्ण ने दूर किया था. वहीं पर राज्य सभा सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया और महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया. इस अवसर पर मुख्य यजमान प्रेमा देवी पत्नी विजय कुमार पांड़े आयोजक विनोद पांड़े, प्रमोद पांड़े, अनुज पांड़े सहित क्षेत्र के अन्य लोग मौजूद रहे.

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