सिंगरामऊ, जौनपुर। आज ठाकुर बाड़ी महिला विकास कल्याण समिति सिंगरामऊ जौनपुर स्थित परियोजना कार्यालय में "टीबी मुक्त भारत अभियान" के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षय रोग (तपेदिक) के नियंत्रण और सामुदायिक विकास की दिशा में ग्रामीणों को सशक्त बनाना रहा।
मुख्य अतिथि एवम जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल सिंह यादव ने लक्षणों को पहचानने और समय पर बचाव के उपायों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि "जल्दी पहचान ही टीबी का सबसे प्रभावी इलाज है।यदि किसी व्यक्ति को 2 हफ्ते से अधिक खांसी, शाम के समय हल्का बुखार, वजन में अचानक कमी, भूख न लगना या बलगम में खून आने की शिकायत हो, तो वह तुरंत सरकारी केंद्र पर अपनी जांच कराए।टीबी का पूर्ण इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है। निक्षय पोर्टल के माध्यम से मरीजों की निगरानी की जाती है।सरकार द्वारा निक्षय पोषण योजना के तहत अब पोषण के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।खाँसते या छींकते समय हमेशा मुँह पर रुमाल रखें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और पौष्टिक आहार लेकर अपनी इम्यूनिटी मजबूत रखें।
डॉ. विशाल सिंह यादव ने चेतावनी दी कि टीबी की दवा का कोर्स बीच में छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है, जिससे बीमारी MDR-TB (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) में बदल सकती है। उन्होंने समुदाय से अपील की कि वे टीबी को लेकर सामाजिक कलंक (Stigma) को खत्म करें और 'टीबी मुक्त भारत' अभियान में अपना सहयोग दें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सलिल यादव जिला परियोजना समन्वयक ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि वर्तमान में लगभग 40% लोग टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित (Latent TB) हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संक्रमण का अर्थ बीमारी नहीं है। शरीर में टीबी के बैक्टीरिया निष्क्रिय अवस्था में रह सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति तब तक "मरीज" नहीं कहलाता जब तक कि उसमें बीमारी के सक्रिय लक्षण न दिखाई दें। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर ही यह संक्रमण सक्रिय बीमारी का रूप लेता है।
संस्था की सचिव श्रीमती डॉ. अंजू सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि "टीबी को जड़ से मिटाने का संकल्प" तभी पूरा होगा जब समाज में सतर्कता बढ़ेगी। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, शाम को बुखार या वजन में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें। सिंगरामऊ स्थित संस्था के कार्यालय के माध्यम से टीबी की जांच और उपचार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन व सहायता प्रदान की जा रही है।
संस्था के टीम लीडर महेन्द्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि केवल दवा से ही टीबी नहीं भागती, बल्कि "सही पोषण" इसका आधार है। मरीजों को प्रोटीन युक्त आहार जैसे दालें, सोयाबीन, मूंगफली और डेयरी उत्पादों को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। साथ ही, 'निक्षय पोषण योजना' के तहत मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
टीबी नियंत्रण के साथ-साथ संस्था ने सामुदायिक विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी दोहराते हुए महिलाओं और युवाओं को स्वास्थ्य एवं स्वरोजगार से जुड़ी जानकारियाँ भी प्रदान कीं। संस्था का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना ही नहीं, बल्कि सिंगरामऊ क्षेत्र के हर नागरिक को स्वस्थ और जागरूक जीवन शैली की ओर प्रेरित करना है।
सिनर्जी संस्था के प्रशिक्षक श्री राम सिंह द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ, प्रतिभागियों को डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसमें विशेष रूप से डिजी लॉकर के प्रयोग के बारे में जानकारी दी गई, ताकि ग्रामीण महिलाएं अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, अंकपत्र) को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकें।अस्पताल में भर्ती होने या किसी सरकारी योजना (जैसे 'निक्षय' सहायता) का लाभ लेते समय, यदि मूल दस्तावेज घर पर छूट जाएं, तो डिजी लॉकर से तुरंत Verified Documents दिखाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय लोकगायक रंग बहादुर यादव ने अपने सुरीले लोकगीतों के माध्यम से समां बांध दिया। उन्होंने गीतों के जरिए टीबी के लक्षणों और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मुफ़्त इलाज की जानकारी बहुत ही सरल अंदाज में दी। वहीं, कवि राम इकबाल यादव 'धेमा' ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से समाज को टीबी के विरुद्ध जंग लड़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी पंक्तियों ने "सतर्कता और सही पोषण" के महत्व को दर्शकों के हृदय तक पहुँचाया। कार्यक्रम में जिले से आए श्री लोकेश जी श्रीवास्तव टी बी हेल्थ विजिटर एवं एक्सरे टेक्नीशियन नितिन कुमार मौर्या के साथ साथ संजीव सिंह, सौम्या,लालमणि मिश्रा, शानू, आयुष,अंश सहित सभी कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था की सचिव/मैनेजर डॉ. अंजू सिंह ने मुख्य अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "TBMVKS सिंगरामऊ क्षेत्र में स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है। टीबी को जड़ से मिटाने का हमारा संकल्प जन-भागीदारी से ही सफल होगा।" उन्होंने रंग बहादुर यादव और राम इकबाल यादव 'धेमा' को उनकी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए विशेष धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के दौरान संस्था की ओर से उपस्थित सभी 200 क्षय रोगियों को 'पोषण पोटली' (न्यूट्रिशन किट) उपलब्ध कराई गई। डॉ. सिंह ने कहा कि सही पोषण और नियमित दवा से टीबी को पूरी तरह जड़ से खत्म किया जा सकता है। मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपील की कि समाज में टीबी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर कर 'टीबी मुक्त भारत' के संकल्प को पूरा करें।


