👉सप्ताहभर अस्पतालों का काटता रहा चक्कर, डा0 सिद्धार्थ के जोड़ने से जिन्दगी हुई मयस्सर
जौनपुर। किन्नर बनने की चाह में एक नर्तक ने खुद बेहोशी देकर ब्लेड से अपना प्राइवेट पार्ट ही काट दिया। परिजन आॢथक तंगी का हवाला देते हुए उसे लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों का चक्कर काटते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कोई मुहमांगी रकम न मिलने तो कुछ हालत गंभीर देखकर वापस कर दे रहे थे।
सप्ताहभर का समय बीत जाने पर जब जख्म से भयंकर दुर्गन्ध उठने लगी और शरीर में जहर फैलने का खतरा बढ़ गया तो परिजन की गुहार पर जनपद के प्रख्यात सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ ने फ्री में ऑपरेशन कर कटे प्राइवेट पार्ट को जोडक़र उसकी जान बचा दिया। उनकी इस दरियादिली से परिजन समेत नात-रिश्तेदारों में भी खुशी की लहर है।
हालंकि पीड़ित अभी भी अस्पताल में भर्ती है परन्तु उसकी हालत खतरे से बाहर है। बताया जाता है कि सिकरारा थाना क्षेत्र के फत्तूपुर अजोसी निवासी अखिलेश कुमार गौतम उम्र 36 वर्ष पिछले कई वर्षों से मोबाइल में वीडियो से प्रभावित होकर किन्नरों के साथ रहकर नाचने-गाने का कार्य कर रहा है। अपनी रूचि के चलते वह समाज की गुरू से दीक्षा लेकर उन्हीं के भेष में रह भी रहा है। अखिलेश के मुताबिक इस पेशा से जुडऩे के बाद ट्रेनों में सफर के दौरान पुलिस परेशान करती है।
एकांत में ले जाकर चेक करने के बाद बेरहमी से मारती है। इन सब से बचाव व पूरी तरह किन्नर बनने के लिए पिछले सप्ताह वह मेडिकल से दवा लेकर खुद बेहोशी दिया और ब्लेड से प्राईवेट पार्ट काट दिया। घटना के समय परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। शाम को भाई जब मजदूरी कर घर लौटा तो उसकी दशा देख दंग रह गया।
पूछे जाने पर बताया कि अब किन्नर बनकर ही रहेंगे। समझाने पर किसी तरह अस्पताल जाने के लिए राजी हो गया। खून से लथपथ हालत में मडिय़ाहूं के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया। वहां के चिकित्सकों ने भी बिगड़ी दशा देख अन्यत्र ले जाने की बात कहकर अपना पीछा छुड़ा लिया। इसके बाद घर चला गया। बड़े अस्पताल जाने के लिए उसके पास पैसा ही नहीं था।
सप्ताहभर बाद जख्म में सड़न होने से दुर्गन्ध आने के साथ हालत गंभीर हो गयी। तत्पश्चात सिटी स्टेशन रोड स्थित एक हॉस्पिटल ले जाया गया वहां 25 हजार की मांग की गयी। देने में असमर्थता जताने पर लौटा दिया गया। इसके बाद कई और हॉस्पिटल जाकर गरीबी का हवाला देते हुए गुहार लगाया लेकिन किसी को भी तरस नहीं आयी। अंत में सिद्धार्थ हॉस्पिटल निकट वाजिदपुर के जाने-माने सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ के पास ले जाया गया। उन्होंने मरीज की चिंताजनक हुई हालत और परिजन की बेबशी देख भर्ती कर फ्री में ऑपरेशन कर कटे प्राइवेट पार्ट को जोडक़र उसकी जान बचा लिया। डा0 सिद्धार्थ की इस दरियादिली से पीड़ित के परिजन एक दूसरे से उनकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे है। पूछे जाने पर डा0 सिद्धार्थ ने बताया कि जब वह मेरे पास आया तो कंडीशन खराब थी। एक गोली सड़ गयी थी। जिसे मजबूरन निकालना पड़ा। अगर तत्काल ऑपरेशन न किया गया होता तो शरीर में जहर फैलने से उसकी जान चली जाती। ऑपरेशन के बाद पूरी तरह ठीक है। ऑपरेशन कर जोड़े गए प्राइवेट पार्ट के रास्ते अब खुलकर पेशाब भी हो रही है। एक-दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।





