👉पूर्व प्रबंधक की पुण्यतिथि पर मानस कथा
जौनपुर। जिस समय भगवान राम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ फूल लेने मिथिलाधिपति जनक की पुष्प वाटिका में पहुंचे, उसी समय जनक नन्दिनी सीता भी सखियों समेत मां पार्वती की पूजा करने पहुंची।
पुष्प वाटिका प्रसंग का श्रृंगार परक चित्रण करते हुए मानस वेत्ता प्रकाशचन्द्र पांडेय विद्यार्थी ने कहाकि रामजी का दर्शन पाने के लिये जब सीता ने लताओं को हाथों से हटाने लगी तो उनके कंगन से मधुर ध्वनि निकली।
इसके बाद सीताजी ने राम को देखने के लिए झुकी तो उनके कमर में बंधी किंकिनी की ध्वनि गूंजने लगी। अंत में सीता जी राम की ओर आकर्षित होकर उनके पीछे चलना आरंभ किया उनके पैरों में बंधे पायलों से छन छनन के बोल गूंज उठे।
इसीलिए बाबा तुलसी ने कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि लिखना पड़ा। मानस वेत्ता ने इसी प्रकार चातक कोकिल कीर चकोरा की व्याख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि पुष्प वाटिका में प्रभु का अद्भुत रूप निरखने तुलसीदास, बाल्मिकि, शुकदेवमुनि, विश्वामित्र और नारद पक्षी बनकर गये। कथा के दूसरे व्यास मानस मधुप डा. आरपी ओझा ने अपने प्रवचन में महाबली हनुमान के पराक्रम का चित्रण किया।
उन्होंने कहाकि प्रभु राम वीर हनुमान से उऋण नहीं हो पाते है। लंका विजय के उपरांत अयोध्या आगमन पर प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता ने अयोध्यावासियों से हनुमान का परिचय कराये। कार्यक्रम में ज्ञानप्रकाश सिंह, सत्यप्रकाश सिंह, दुष्यंत सिंह एडवोकेट, डा. हरिओम् त्रिपाठी, डा. आरएन त्रिपाठी, भाजपा नेता अशोक उपाध्याय, वीरेन्द्र सिंह एडवोकेट, पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह, ब्रहृमदेव मिश्र आदि ने कथा व्यास को माल्यार्पित किया। संचालन आशुतोष सिंह एवं आभार ज्ञापन तिलकधारी महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेन्द्र सिंह ने किया।





