जौनपुर। नगर के रामनगर भड़सरा मुहल्ले में पं. सुरेश त्रिपाठी के आवास पर चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन आचार्य धर्मराज तिवारी ने कहाकि बालक कृष्ण ने सभी गोपों से कहाकि वे इन्द्र की पूजा छोड़कर गोबर्धन पर्वत की पूजा करें। कृष्ण की बात मानकर ग्वालों ने इन्द्र की पूजा करना छोड़ दिया। सभी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। देवराज इन्द्र रूष्ट हो गये। उन्होंने बादलों को आदेश दिया कि घनघोर वर्षा करके वृन्दावन में प्रलय मचा दें। आकाश से मूसलाधार वर्षा होने लगी। वृंदावन में त्राहि-त्राहि मच गयी। वृंदावनवासियों को इन्द्र के कोप से बचाने के लिए अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्घन पहाड़ उठा लिया। सात दिनों तक लगातार बरसने के बाद सभी बादल थक हारकर बैठ गये। इस प्रकार भगवान कृष्ण ने ग्वालों की रक्षा की। इसके पूर्व कथा व्यास ने नल कूबर उद्वार, बकासुर-वध आदि प्रसंगों का प्रभावी चित्रण किया।
