Type Here to Get Search Results !

JAUNPUR NEWS : ARTO कार्यालय में डंपर रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल, RI और ARTO की भूमिका पर भी जांच की मांग

जौनपुर। जिले के ARTO कार्यालय में डंपर रजिस्ट्रेशन को लेकर 21 और 22 अगस्त 2026 को हुए विवाद के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सामने आए दस्तावेजों के आधार पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी केवल बाबू गणेश दत्त मिश्रा तक सीमित है, या फिर इसमें RI और ARTO स्तर की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?

मामला उस समय चर्चा में आया जब रजिस्ट्रेशन बाबू गणेश दत्त मिश्रा को निलंबित किए जाने की कार्रवाई सामने आई। हालांकि, अब तक उनकी ओर से मीडिया के सामने कोई विस्तृत सफाई नहीं आई है। वहीं, उपलब्ध बताए जा रहे दस्तावेजों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि वह अपने विभाग और संगठन के सामने लगातार अपनी बेगुनाही से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं।

पहला सवाल वाहन के दस्तावेजों की कंप्यूटर फीडिंग को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिस वाहन का हलफनामा 21 अगस्त की शाम करीब 5 बजे ई-स्टांप पर तैयार हुआ, उसी वाहन के प्रपत्रों की कंप्यूटर फीडिंग दोपहर करीब 1:45 बजे पूरी होने का दावा किया जा रहा है। यदि दस्तावेज वास्तव में बाद में तैयार हुआ, तो उससे पहले कंप्यूटर में पूरी प्रक्रिया कैसे दर्ज हुई? इसकी जांच जरूरी है।

दूसरा सवाल इलेक्ट्रॉनिक कांटा रसीद को लेकर है। बताया जा रहा है कि 19 अगस्त को सुबह करीब 9:30 बजे दो वाहनों की कांटा रसीद बनी, जबकि उन्हें अस्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र के साथ बाद में ARTO कार्यालय में संलग्न किया गया। यदि नियमों के अनुसार व्यावसायिक वाहन को अस्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही एजेंसी से बाहर निकालने की प्रक्रिया होती है, तो सुबह की कांटा रसीद और बाद में हुए अस्थायी पंजीयन के बीच का अंतर जांच का विषय क्यों नहीं होना चाहिए?

यहीं से सवाल RI और ARTO की भूमिका पर भी उठता है। क्या अधिकारियों के निर्देश, दबाव या किसी अन्य कारण से ऐसे प्रपत्रों की फीडिंग कराई गई? क्या बाबू गणेश दत्त मिश्रा ने अधूरे प्रपत्रों के कारण फीडिंग से इनकार किया था और इसी वजह से उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ा? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष विभागीय जांच से ही सामने आ सकता है।

यह कहना उचित नहीं होगा कि बाबू गणेश दत्त मिश्रा ईमानदार हैं या दोषी। इसका निर्धारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। लेकिन यदि दो अलग-अलग मामलों में दस्तावेजी विसंगतियां सामने आती हैं, तो जांच केवल कर्मचारी तक सीमित न रहकर पूरी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका तक पहुंचनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदारी केवल रजिस्ट्रेशन बाबू की क्यों? और यदि प्रक्रिया नियमानुसार हुई, तो उसके समर्थन में विभाग के पास क्या दस्तावेज और रिकॉर्ड हैं?

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति के बीच जौनपुर ARTO कार्यालय से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि गलती किस स्तर पर हुई, किसने किस आधार पर फीडिंग कराई और निलंबन की कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

मामला अब केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं है। सवाल पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर है। इसलिए निष्पक्ष जांच ही यह तय कर सकती है कि जिम्मेदारी वास्तव में किसकी है और यदि कहीं भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जड़ तक कार्रवाई कब पहुंचेगी।

Tags

Top Post Ad

Below Post Ad