जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत के एक चौथाई श्लोक को पढ़ने या सुनने से एक हजार गौदान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति केवल छह मिनट भी साधु-संतों की संगति कर ले तो उसका जीवन धन्य हो सकता है। मनु की संतान होने के कारण ही हम सभी मानव कहलाते हैं।
कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा को पढ़ने और सुनने मात्र से जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को थोड़ा समय निकालकर प्रतिदिन भागवत के श्लोकों का पाठ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन भगवान को एक श्लोक सुनाकर देखिए, इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ के परिवार के चारों पुष्प भागवत कथा का आयोजन कर अपने पूर्वजों के कल्याण के साथ लोगों को कथा श्रवण का सौभाग्य प्रदान कर रहे हैं।
पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कहा कि ईंट-पत्थर से बने मकान को ही घर नहीं कहा जा सकता। जिस घर में गृहिणी होती है, वही वास्तविक अर्थों में घर होता है। उन्होंने राजा उत्तानपाद की कथा का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। मां और बेटे के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मां बच्चों की पहली गुरु होती है। मां से मिलने वाले संस्कार ही बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य की नींव रखते हैं। अच्छे संस्कार मिलने पर बच्चे जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं, जबकि संस्कारों की कमी उन्हें गलत रास्ते पर ले जा सकती है।
कथाव्यास ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में दूसरों के प्रति अमंगल की भावना होती है, उसका कभी मंगल नहीं हो सकता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सबके कल्याण की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा हो तो इस संसार में सब कुछ संभव है। इस अवसर पर अजय कुमार सिंह, चंद्रप्रकाश सोनी, डॉ. ब्रह्मेश शुक्ला, गंगाधर शुक्ला, अर्चना सेठ, अजीत सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
