👉जिला औषधि निरीक्षक रजत पांडेय की सख्त कार्रवाई का उच्च न्यायालय में दिखा असर
जौनपुर। शासन के निर्देशों की धज्जी उड़ाने वाले प्रतिबंधित कोडिंन कफ सिरप कांड से जुड़े नशे के सभी 12 सौदागरों कि याचिका उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निरस्त कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय द्वारा पूर्व में शैली ट्रेडर्स व जनपद के 12 अन्य मेडिकल प्रतिष्ठानों पर दर्ज की गई एफआईआर प्रकरण में घटना से जुड़े आरोपितों को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया। उधर उच्च न्यायालय में नशे के सौदागरों की याचिका रद्द होने से प्रदेश की आयुक्त रोशन जैनब खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन ने भी जौनपुर में हुई कार्रवाई पर बड़ी शाबासी दी है।
प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र बिंदु बने कोडीन कफ सिरप के इस बहुचर्चित मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जौनपुर के सभी 12 आरोपितों द्वारा अपने बचाव के लिए दर्ज मुकदमे से संबंधित एक रिट याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर बेहद ही गंभीरता से सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट द्वारा आरोपितों की याचिका को खारिज किए जाने से यह साफ हो गया कि जौनपुर के जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय द्वारा की गई कार्रवाई मिल का पत्थर साबित हो रही है। इस संबंध में जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय ने बताया कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद का यह न्याय जनहित में एक स्तंभ के रूप में दिया गया है। अब औषधि के गलत तरीके से व्यापार करने वाले , कोडिन युक्त कफ सिरप एव अन्य एनआरएक्स श्रेडी की औषधियों की गैरकानूनी व्यापार में शामिल लोगों को डर रहेगा।
जनपद की औषधि निरीक्षक द्वारा यह भी बताया गया की दिल्ली स्थित संचालित फर्म एस वी ट्रेडर्स परपतगंज, दिल्ली के संचालक शादाब पुत्र रियाज़ निवासी गाजियाबाद द्वारा लगभग 48 हजार कोडिन युक्त एस्कुफ कफ सिरप की अवैध रूप से बिक्री विशेसरगंज जौनपुर स्थित फर्म मनीष मेडिकल एजेंसी को हुई है जबकि अर्जुन सोनकर पुत्र प्रेमचन्द्र सोनकर की फर्म मनीष मेडिकल एजेंसी जांच के दौरान मौके पर संचालित ही नहीं हो रही है। इनके द्वारा सप्लाई की गई कफ सिरप की अनुमानित कीमत 35 लाख रुपये आकी गई है। जिले के एएसपी गोल्डी गुप्ता के निर्देश पर पूर्व में दर्ज की गई एफआईआर में समयोजित कर प्रकरण की विवेचना एवं वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
डीआई की जांच में खुल गया घोटाले की पोल
जौनपुर। जिले में कोडिन युक्त कफ सिरप का इतनी भारी मात्रा में खरीद-दारी कर औषधि अनुज्ञप्ति के पृष्ठभूमि में कूट रचित बीजको के आधार पर गैर चिकित्सा प्रयोग हेतु नशे की रूप में खुली बाजार में अवैध रूप से कानून की धज्जी उड़ाते हुए बेचा गया है।
इस संबंध में जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय का मानना है कि उक्त फर्म के संचालकों की सिर्फ और सिर्फ मंशा अधिक धन कमाने के उद्देश्य ही था।
सरकारी मानकों को दरकिनार कर कोडिंन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप बेचने से आम जनता पर क्या प्रभाव होगा इसके बारे में उक्त फर्म के संचालकों ने कभी सोचा ही नहीं।
20 मेडिकल स्टोर लाइसेंस धारकों का रद्द होगा लाइसेंस
जौनपुर। प्रतिबंधित कोडिंन कफ सिरप के अवैध धंधे में शामिल जिले के 20 मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस अब निरस्त किए जाएंगे।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में शुक्रवार को इन संचालकों की याचिका निरस्त होने के बाद से जौनपुर के जिला औषधि निरीक्षक की कार्रवाई प्रदेश शासन द्वारा चलाए गए अभियान में पारदर्शिता के मामले में मील का पत्थर साबित हो गई। इसी आधार पर अब एफआईआर की गिरफ़्त में आने वाले सभी 20 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस के निरस्तिकरण की कार्यवाई शुरू कर दी गई है। जो दुकाने भौतीक रूप से संचालित नहीं हैं।
उनके खिलाफ अलग से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सात अन्य मेडिकल स्टोर को चिन्हित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यहां से भी कोई जवाब न मिलने पर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजा गया है। ऐसे में यह साबित होता है कि फर्जी वाड़े के धंधे में यह लोग पूरी तरह से शामिल हैं। लिहाजा इनका भी लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।


