जौनपुर। जलालपुर क्षेत्र के थोर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन सनातन सेवा ग्राम परिसर में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कथा के अंतिम दिन ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति से युक्त जीवन ही वास्तव में श्रेष्ठ और सार्थक होता है। उन्होंने कहा कि बिना ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के जीवन दिशाहीन हो जाता है। मनुष्य का वास्तविक मूल्य उसके गुणों से तय होता है और जिसके भीतर जितने अधिक सद्गुण होते हैं, वही उतना ही श्रेष्ठ माना जाता है।
शंकराचार्य ने कहा कि जीवन में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का संतुलन अत्यंत आवश्यक है। यही तीनों तत्व मनुष्य को आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि गीता ज्ञान, कर्म और भक्ति की त्रिवेणी है, जो मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।
कथा के दौरान मारकंडेय महादेव एवं गोमती त्रिमुहानी का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस का पान कराया गया। समापन अवसर पर संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। इस धार्मिक आयोजन के आयोजक रामसागर दुबे एवं आत्माराम दुबे रहे। कार्यक्रम में डॉ. बीडी मिश्र, पंडित प्रदीप मिश्र, अतुल पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।


