👉पूर्व प्रबंधक स्व. अशोक सिंह की पुण्यतिथि पर मानस कथा
जौनपुर। बिना सत्संग किये मनुष्य के भीतर विवेक जागृत नहीं होता। यह सत्संग भी प्रभु की कृपा से ही प्राप्त होता है। उक्त विचार मानस वेत्ता पं. प्रकाश चन्द्र पांडेय विद्यार्थी ने तिलकधारी महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक स्व. अशोक कुमार सिंह की पंचम पुण्यतिथि पर आयोजित त्रिदिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन व्यास पीठ से व्यक्त किया।
उन्होंने राम अनुज मन की गति जानी चैपाई की व्याख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि गुरू विश्वामित्र के आश्रम में लक्ष्मण जी अपने भाई राम के चरणों को अपनी छाती पर रखकर लेटते थे। प्रभु राम उनके हृदय की धड़कनों का अनुभव अपनों पैरों के माध्यम कर लेते थे। श्री विद्यार्थी ने श्रीराम चरित मानस की एक दो चैपाइयों पर अनुचित टिप्पणी करके समाज में विद्वेष पफैलाने वालों से लोगों को सावधान करते हुए कहाकि किसी गंभीर विषय पर ओछे लोग कुछ उलटी सीधी बातें कहें तो इस पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिये।
कथा के दूसरे व्यास मानस मधुप डा. आरपी ओझा ने कहाकि राजा जनक की सभा में प्रभु राम को लोगों ने अपनी अपनी भावनाओं के अनुरूप देखा। उन्होंने-डरे कुटिल नृप प्रभुहिं निहारी चैपाई का उद्धरण देते हुए कहाकि दुष्ट राजाओं ने उन्हे भयंकर प्रतिमा के समान देखा तो वहीं असुरों को वे साक्षात काल के रूप में दिखायी पड़े।
जनकजी और उनके परिवार के लोगों ने प्रभु को सगे संबंधी के रूप में देखा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद डा. केपी सिंह, डा. ओपी सिंह रघुवंशी, डा. आरएन त्रिपाठी, पूर्व प्रमुख सुरेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र सिंह एडवोकेट, डा. श्रीप्रकाश सिंह, डा. रामअवध यादव, देवेन्द्र सिंह, डा. रामआसरे सिंह, लल्लन सिंह, राजीव सिंह, सर्वेश सिंह, हरिनाथ शुक्ल आदि ने कथा व्यास को माल्यार्पण किया। आभार ज्ञापन तिलकधारी महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेन्द्र सिंह ने किया।





