जौनपुर। गुरुवार को आर. एन. टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जी की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री ज्योति स्वरूप शुक्ल (अपर आयुक्त, राज्य कर (GST), वाराणसी) तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री वरुण कुमार त्रिपाठी (उप आयुक्त, राज्य कर (GST), जौनपुर), श्री सतेंद्र कुमार सिंह (उप आयुक्त, राज्य कर (GST), वाराणसी) एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मोहम्मद ज़ाहिद (Chest Specialist, MBBS, M.D.) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ज्योति स्वरूप शुक्ल, विशिष्ट अतिथि श्री वरुण कुमार त्रिपाठी, श्री सतेंद्र कुमार सिंह, डॉ. मोहम्मद ज़ाहिद, विद्यालय के प्रबंधक डॉ. पी. के. सिंह एवं संस्थापिका डॉ. शीला सिंह के कर-कमलों द्वारा माँ सरस्वती एवं गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। दीपों की आलोकमयी छटा एवं वैदिक मंत्रोच्चारण से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं प्रेरणादायी बन उठा।
इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना, गुरुदेव टैगोर जी के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन, समूह गीत, नृत्य एवं विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन एवं सांस्कृतिक चेतना ने सभी अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि श्री ज्योति स्वरूप शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुदेव टैगोर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा एवं मानवता के अमर प्रतीक थे। उन्होंने विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों एवं अनुशासन के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
विशिष्ट अतिथि वरुण कुमार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में विद्यालय की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में संस्कार, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करते हैं। इसी अवसर पर श्री वरुण कुमार त्रिपाठी जी द्वारा विद्यालय के लिए उनकी स्वरचित एवं अत्यंत प्रेरणादायी विद्यालय कुलगीत का भव्य अनावरण भी किया गया। कुलगीत के अनावरण का वह ऐतिहासिक क्षण सम्पूर्ण विद्यालय परिवार के लिए गौरव, हर्ष एवं अमरत्व का प्रतीक बन गया। कुलगीत की प्रत्येक पंक्ति में विद्यालय की गौरवशाली परंपरा, संस्कार, अनुशासन एवं उज्ज्वल भविष्य की प्रेरणा झलक रही थी। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि के साथ इस अनुपम कृति का स्वागत किया। विद्यालय परिवार ने इसे अपने इतिहास का स्वर्णिम एवं अविस्मरणीय अध्याय बताया।
विशिष्ट अतिथि सतेंद्र कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को निरंतर परिश्रम एवं लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया, जबकि डॉ. मोहम्मद ज़ाहिद ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी।
विद्यालय के प्रबंधक डॉ. पी. के. सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि गुरुदेव टैगोर जी के आदर्शों एवं सिद्धांतों के आधार पर ही एक सशक्त एवं संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने गुरुदेव के प्रसिद्ध संदेश “एकला चलो रे” पर विशेष बल देते हुए कहा कि श्रेष्ठ कार्य करने हेतु व्यक्ति को आत्मविश्वास एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
संस्थापिका डॉ. शीला सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “विद्या ही एकमात्र ऐसा धन है, जिसे जितना अधिक बाँटा जाए, वह उतना ही बढ़ता है।” उन्होंने विद्यालय के मूल मंत्र “शिक्षार्थ आइए एवं सेवार्थ जाइए” को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।
इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सत्र 2025-26 में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी टैगोरियन छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रीति शिखा सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की सराहना करते हुए सभी को टैगोर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
इस शुभ अवसर पर सम्मानित अभिभावकगण, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।



