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JAUNPUR NEWS : अकीदत से मनाया गया हजरत हम्जा चिश्ती र.अ. का 551वां सालाना उर्स

जौनपुर। नगर के पचहटियां स्थित विशेषरपुर दरगाह पर हजरत हम्जा चिश्ती र.अ. का 551वां सालाना उर्स-ए-मुबारक पूरी अकीदत, श्रद्धा और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंदों ने पहुंचकर मजार पर चादरपोशी की और देश में अमन, खुशहाली व आपसी भाईचारे की दुआएं मांगीं। पूरे दिन दरगाह परिसर में धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह छह बजे गुस्ल-ए-मजार से हुई। दरगाह कमेटी के अध्यक्ष शमशेर कुरैशी और कन्वीनर अरशद कुरैशी ने मजार पर चादर चढ़ाकर अकीदत का इजहार किया। सुबह नौ बजे कुरआनख्वानी का आयोजन हुआ। इसके बाद जलसा-ए-सीरतुन्नबी स.अ.व. में वक्ताओं ने पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत और उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। मौलाना कयामुद्दीन ने कहा कि समाज में अमन, इंसानियत और भाईचारे को मजबूत करने के लिए सीरत-ए-पाक के संदेश को अपनी जिंदगी में उतारना जरूरी है। मौलाना नसीम रजा जौनपुरी ने नात पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।

जुहर की नमाज के बाद दरगाह परिसर में भव्य लंगर का आयोजन किया गया। इसमें दूर-दराज से पहुंचे जायरीन समेत बड़ी संख्या में लोगों ने नि:शुल्क भोजन ग्रहण किया। लंगर के दौरान आपसी भाईचारे और सेवा की मिसाल देखने को मिली।

शाम चार बजे सेंट पैट्रिक स्कूल के सामने से जुलूस-ए-चादर निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। विभिन्न स्थानों से पहुंचे फन-ए-सिपहगरी के अखाड़ों ने अपने हैरतअंगेज करतब और कला का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जुलूस निर्धारित मार्गों से होता हुआ दरगाह परिसर पहुंचा, जहां अकीदत के साथ चादर पेश की गई।

शाम सात बजे दरगाह परिसर में कौमी एकता कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता मरकजी सीरत कमेटी के अध्यक्ष ओबैदा शिराजी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सरफराज खान, चेयरमैन प्रतिनिधि नगर पंचायत जफराबाद तथा मुख्य वक्ता के रूप में संजीव यादव एडवोकेट, मुख्य ट्रस्टी श्री गणपति पूजा महासमिति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के संयोजक अरशद कुरैशी ने सभी अतिथियों का साफा बांधकर और गुलपोशी कर स्वागत किया। मुख्य वक्ता संजीव यादव ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता, सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्य अतिथि डॉ. सरफराज खान ने कहा कि उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन की मौजूदगी बुजुर्गों के प्रति लोगों की गहरी आस्था और श्रद्धा को दर्शाती है।

अध्यक्षता कर रहे ओबैदा शिराजी ने कहा कि बुजुर्गों और औलिया-ए-किराम ने हमेशा एकता, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया है। आज जरूरत है कि हम उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा दें।

रात्रि नौ बजे महफिल-ए-समां का आयोजन हुआ। पगड़ीबंद कव्वालों ने सूफियाना कलाम और कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। देर रात तक दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की भीड़ जुटी रही और लोग सूफियाना कलाम का आनंद लेते रहे।

दरगाह कमेटी के कन्वीनर अरशद कुरैशी ने उर्स को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी मेहमानों, जायरीन, अकीदतमंदों और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उर्स के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस के साथ महिला कांस्टेबलों की भी तैनाती की गई थी।

कार्यक्रम का कुशल संचालन पत्रकार अजवद कासमी ने किया। इस अवसर पर मरकजी सीरत कमेटी के कन्वीनर फिरोज अहमद पप्पू, हाजी नेहाल अंसारी, सद्दाम हुसैन, शकील मंसूरी, जिलानी खान, रफीक मंसूरी, इम्तियाज अहमद रज्जू, अमजद अंसारी, आजम केकेआर, साजिद अलीम, दानिश इकबाल समेत बड़ी संख्या में जायरीन एवं अकीदतमंद मौजूद रहे।

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